Friday, 12 January 2018

क्रमांक -3/2009-3 kavita ansh

क्रमांक -3/2009-3
लज्जा में रहकर सलीके से
तुम कुछ कहती हो
ईशारे से वो बात
हम कब समझ पायेंगे
उन्हें हम प्यार से समझायेंगे 😜

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