Tuesday, 12 April 2016

तुमको बस देखता रह गया...

क्रमांक-5/4-2016
जय हनि
तुमको बस देखता रह गया
देखा है जब से तुमको, तुमको बस देखता रह गया।
जानना चाहा तुमको ओर बस तुमको, सिर्फ तुमको सोचता रह गया ॥
                                  तुमको बस देखता रह गया...

आओ साथ बैठकर बात करे हम, तुम बोलती रही बस मैं सुनता रह गया।
अल्फाज टकराये भी जब साथ हमारे, नजर से नजर मिलाता रह गया।।
                                 तुमको बस देखता रह गया...

बात हुई कुछ तुमसे, भाव समझता रह गया ।
करनी बात तुमसे बहुत सी है, पर शब्दों को सींचता रह गया॥
                                 तुमको बस देखता रह गया...

उठे इस कदर ऒर तुम चल दिये, पुकरता मैं कई बार रह गया।
याद है वो अदा मुझे आज भी, जिसे देखता मैं रह गया॥
                                 तुमको बस देखता रह गया...

आओ बैठकर कुछ बात करे, वक्त ठहर सा गया।
जी ले इस पल को "अभि", तुमको बस देखता रह गया...
                            तुमको बस देखता रह गया...

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