194. समझ लो मेरा तरीक़ा ही
चला था जिस रास्ते पर चल सका ना
जानते हुए भी रुक सका न मैं
किया तुने जो काम शाबासी से
समझ न सका मैं गया दब
जानती थी पहले ही सब, अब जा
थी दीवानगी मेरी इतनी जान सका न
जानती थी ना तुम आगे
था जो झुठा सच्चा सब "अभि" मैं जान गया
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